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दुःखो की धूप में

दुःखो की धूप में
 
 छांव बन कर आए हैं। 
  मेरी हर तकलीफ को आप ने

   हर बार अपनाया हैं।।
  कैसे करूं आप का
 शुक्रिया मेरे सतगुरु
 आप ने ही तो मुझ जैसी

 कंकर को हीरा बनाया

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*मुस्कान और मदद ये दो*          *ऐसे इत्र हैं जिन्हें जितना*         *अधिक आप दूसरों पर*            *छिड़केंगे उतने ही*        *सुगन्धित आप स्वंय होंगे..

Chudamani Story in Ramayan

रहस्यमई “चूडामणि” का अदभुत रहस्य “ आज हम रामायण में वर्णित चूडामणि की कथा बता रहे है। इस कथा में आप जानेंगे की- १–कहाँ से आई चूडा मणि ? २–किसने दी सीता जी को चूडामणि ? ३–क्यों दिया लंका में हनुमानजी को सीता जी ने चूडामणि ? ४–कैसे हुआ वैष्णो माता का जन्म? चौ.-मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा। जैसे रघुनायक मोहि दीन्हा।। चौ–चूडामनि उतारि तब दयऊ। हरष समेत पवनसुत लयऊ।। चूडामणि कहाँ से आई? सागर मंथन से चौदह रत्न निकले, उसी समय सागर से दो देवियों का जन्म हुआ – १– रत्नाकर नन्दिनी २– महालक्ष्मी रत्नाकर नन्दिनी ने अपना तन मन श्री हरि ( विष्णु जी ) को देखते ही समर्पित कर दिया ! जब उनसे मिलने के लिए आगे बढीं तो सागर ने अपनी पुत्री को विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य रत्न जटित चूडा मणि प्रदान की ( जो सुर पूजित मणि से बनी) थी। इतने में महालक्षमी का प्रादुर्भाव हो गया और लक्षमी जी ने विष्णु जी को देखा और मनही मन वरण कर लिया यह देखकर रत्नाकर नन्दिनी मन ही मन अकुलाकर रह गईं सब के मन की बात जानने वाले श्रीहरि रत्नाकर नन्दिनी के पास पहुँचे और धीरे से बोले ,मैं तुम्हारा भाव जानता हूँ, पृथ्व...

तो बुरे लगने लगते हैं

 *लोग बुरे नहीं होते....* , *बस जब हमारे मतलब के नहीं होते..तो बुरे लगने लगते हैं॥* *समझना है जिंदगी को,तो पीछे देखो,* *जीना है जिंदगी को..तो आगे देखो।* *हम भी वही होते हैं, रिश्ते भी वही होते हैं और रास्ते भी वही होते हैं।* *बदलता है तो बस ,,,,समय, एहसास, और नज़रिया॥*   *जय श्री राम *